क्षेत्र में अमरीका और ज़ायोनी शासन की नीतियों को आगे बढ़ाने वाले के रूप में सऊदी अरब, सीरिया की अशांति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस प्रकार से कि सीरिया की अशांति के दौरान गिरफ़्तार बहुत से आतंकवादियों ने स्वीकार किया है कि वह सऊदी अरब के लिए कार्य करते हैं। सीरिया की सरकारी समाचार एजेन्सी साना की रिपोर्ट के अनुसार हमा नगर से गिरफ़्तार एक आतंकवादी ने स्वीकार किया कि सीरिया में हालिया दिनों में हुई अशांति और झड़पों में सऊदी अरब के नागरिक और वहाबी गुट जुन्दुश्शाम के सदस्य शामिल थे। सीरिया के हमा नगर से गिरफ़्तार होने वाले अम्मार ज़ियाद ने स्वीकार किया है कि यह लोग नगर में उपस्थित थे और हम उन्हें नहीं पहचानते थे और वह हमा नगर के निवासियों से भी बात चीत नहीं करते थे। उसने स्पष्ट किया कि वह सबके सब आधुनिक शस्त्रों से लैस थे और हमको बाद में पता चला कि यह जुन्दुश्शाम के सदस्य हैं। उनका कार्यक्रम पुलिस व सुरक्षा बलों की चौकियों और छावनियों पर आक्रमण करना था। जुन्दुश्शाम वहाबी लोगों का वही गुट है जो दक्षिणी लेबनान में फ़िलिस्तीनियों के शिवरों में घुस गया था और काफ़ी उत्पात मचाया था। इन्हीं लोगों ने वर्ष 2009 में दमिश्क़ में सीरिया की गुप्तचर संस्था के कार्यालय पर आक्रमण करके 17 लोगों की हत्या कर दी थी। उसने इस बात को भी स्वीकार किया कि सुरक्षा बलों व पुलिसकर्मियों को बदनाम करने के लिए विदेशी संचार माध्यमों को ग़लत समाचार दिए जाते थे। टीकाकारों का मानना है कि क्षेत्र में ज़ायोनी विरोधी नीतियों को अपनाने और लेबनान में प्रतिरोध के समर्थन के कारण बश्शार की सरकार से अमरीका क्रोधित है और पूर्वनियोजित कार्यक्रम के अंतर्गत सऊदी सरकार के साथ मिलकर दंगाईयों को सीरिया भेज रहा है। इसी प्रकार रशा टूडे से साक्षात्कार में अमरीका के शिकागो नगर के राजनैतिक टीककार स्टीफ़न लैंडमैन ने कहा कि अमरीका ने दो वर्ष पूर्व सऊद अरब व जार्डन के साथ मिलकर सीरिया के मामलों में हस्तक्षेप करना आरंभ किया और इस देश की अशांति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सीरिया की सरकार के लिए अब यह स्पष्ट हो गया है कि शत्रु देशों ने इस देश की जनता की सरकार को समाप्त करने पर कमर बांध ली है। इन षड्यंत्रों को विफल बनाने के लिए सीरिया की सरकार व जनता और मित्र देशों को बड़ी होशियारी से कार्य करना होगा।(एरिब डाट आई आर के धन्यवाद के साथ).......166